कुत्तों की करतूत

कुत्तों की करतूत से ठेस लगी चौहान के आदर को
मन्दिर भी भूलेंगे कल, जो भूले आज अनादर को
लाचारो के लहू से लाल थे लव जिसके उसके ऊपर
प्रथ्वी के प्यादे पहुँचे हैं आज चढ़ाने चादर को

कवि देवेन्द्र प्रताप सिंह “आग”
9675426080
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