एक कटाक्ष मन्दिर के ठेकेदारों पर

अम्बेडकर जी के जन्मदिन पर उनके जन्मस्थान पर जानेवाले और रामजन्मदिवस पर जन्मभूमि को भूलने वाले मोदी जी को धिक्कारती मेरी ताजा रचना —-

रचनाकार- कवि देवेन्द्र प्रताप सिंह “आग”
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सुनो दलालो सत्ता के हिंदुत्व के ठेकेदार सुनो
जन्मभूमि पर मंदिर के निर्माण के जिम्मेदार सुनो

भीम जन्म पर भीम-जन्मभूमि की याद तुम्हें आयी
रामजन्म पर जन्मभूमि की यादें तुमने बिसरायी

पहुँच गये जो भीम के घर तो अच्छी सोच तुम्हारी है
रामलला की सुध क्या एक चुनावी जिम्मेदारी है

मर्यादा का जीवन जिसका उसका घर क्यों भूल गये
क्या सत्ता की आँधी में ये पंख तुम्हारे झूल गये

एक लीक पर सत्ता के सब प्यादे चलते आए हैं
सब भोले हिंदू को छल करके ही छलते आए हैं

सुनो दलालो डर लगता हो गर सरयू तट जाने में
डर लगता हो गर जेहादी टुकडों को धमकाने में

घेरा हो तुमको फिर तुष्टिकरण की इस बीमारी ने
फैंका जाल मोमिनो ने या लालच दिया बुखारी ने

फ़िर इतना सुन लो तुम हो हिंदुत्व के ठेकेदार नहीँ
वोट बैंक के दल्ले हो मंदिर के जिम्मेदार नहीँ

कब, कैसे और क्या होगा ये आज हमे बतलाओ जी
बातों का बाजार नहीँ कुछ तो करके दिखालाओ जी

राम भक्त हैं, देशभक्त हैं, खुद का भक्त समझना मत
उलझाना हो बातों में तो हमसे कभी उलझना मत

“आग” कहे हम सब मिलकर के जंग तो खुद ही लड़ लेंगे
आगे जो मंदिर के होंगे वो भी रामायण पढ़ लेंगे

——-कवि देवेन्द्र प्रताप सिंह “आग”

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  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 25/04/2016

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