पाखंडी इंसान

बनता महान कैसा पाखंडी इंसान आज
देखो इसे कैसी मजबूरियां दिखाई दें
घर में ना बेटियाँ हैं ढूंढे आज घर-घर
मिले ना तो देवियों से दुरियाँ दिखाई दें
बेटियाँ जो आज तक बोझ ही दिखीे थीं इसे
आज भवतारिणी ही बेटियाँ दिखाई दें
मारता था कोख में ही जिन बेटियों को इसे
आज वही बेटियाँ ही देवियां दिखाई दें

कवि देवेन्द्र प्रताप सिंह “आग”
9675426080
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