घड़ियाली गैंग

कोल्लम काण्ड पर घड़ियाली मोमबत्ती गैंग की चुप्पी पर मेरी पंक्तियाँ —-

पेरिस, पेशावर, ब्रसेल्स और रक्का पर
आँखे भर रोये जो दलाल वो कहाँ गये
आलियान को जो देख के बिलख रोये
और रोये देख घायल नेपाल वो कहाँ गये
जगह-जगह श्रद्धांजली के जज्बात जले
दिन रात मोमबत्ती के टाल वो कहाँ गये
कोल्लम की कोख में किया कुठाराघात
काल ने तो आँसुओं के घड़ियाल वो कहाँ गये

कवि देवेन्द्र प्रताप सिंह “आग”
9675426080

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