“ माँ और बचपन “

“ माँ और बचपन “

जब मैं छोटा बच्चा था ,
मेरी माँ सबकुछ सिखाती थी ,
गुरु के ऊपर थोप कर बताती थी ,
तब मै कुछ नही समझता था ,
पर अब मै सब समझता हूँ ,
हिमालय से लेकर हिन्द-महासागर का ,
खूबियों को परखता हूँ ,
मै तो वो वनवाशी था ,
जो वन में भटका करता था ,
अपने जीवन के बारे में,
कुछ भी नही सोचा करता था ,
अज्ञानी पशु समान को ,
मनुष्य बनाते है गुरु ,
राम जैसे लोगो को भी ,
रह धिक्लाते है गुरु !

नाम : कवि निशांत भारद्वाज राजपूत
उपनाम: विद्रोही कवि भारद्वाज
जन्म-तिथि : 26 जनवरी 1995,
जन्म-स्थान : ग्राम-अमवां , नवादा ,(बिहार)

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लेखक : कवि निशांत भारद्वाज राजपूत

One Response

  1. babucm babucm 25/04/2016

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