मेरी क्लास का वो बच्चा

बच्चा वो लास्ट बेंच पर बैठा हुआ।
कई रोज़ से चुप चुप,
पर बोहोत कुछ कहता हुआ।
ना पढ़ना न लिखना,
ना शरारत किसी से।
खोया था वो खुद में,
गुमसुम सा लेटा हुआ।
एक दिन बुलाने पर वो रोने लगा,
हिम्मत करके बस इतना ही कह सका-“पापा दारु पीते हैं”
फड़कने लगा वो दीपक बुझता हुआ।
एक और बचपन दर्द के आगोश में सिमटता हुआ!!

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