सच से रूबरू

सच से रूबरू हो जाता हू l
जब में अस्पताल जाता हू l
अपने दर्द को भूल जाता हू l
जब दूसरों को दुःखी पाता हू ll

सच से रूबरू हो जाता हू l
जब में शमशान जाता हू l
चिता की जलती हुई अग्नि में l
अहम को जलता हुआ पाता हू ll

सच से रूबरू हो जाता हू l
जब किसी वृद्ध को सामने पाता हू l
रूप पर गुरुर करना भूल जाता हू l
जब उसके चेहरे में अपना चेहरा पाता हू ll

सच से रूबरू हो जाता हू l
जब मौत को करीब देख पाता हू l
पैसो पर घमंड करना भूल जाता हू l
जब पैसो से जिंदगी खरीद नहीं पाता हू ll

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4 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 23/04/2016
  2. babucm babucm 23/04/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/04/2016
  4. a k nema 24/04/2016

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