“क्षणिकाएँ”

आजकल पता नही क्यों ?
गुलाब खूबसूरत तो बहुत होते हैं
मगर उनमें खुश्बू नही होती
लगता है इनको भी शहरों की
लत लग गई है ।

(2)

मेरी लिखावट में कुछ कमी सी है
काम तो भारी है
ठीक तो करना ही पड़ेगा
कुछ काम गणित के सवाल होते है
समझ में आ जाए तो ठीक
ना आए तो जी का जंजाल होते हैं

“मीना भारद्वाज”

10 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/04/2016
    • Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 23/04/2016
  2. babucm babucm 23/04/2016
    • Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 23/04/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 23/04/2016
    • Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 23/04/2016
  4. Saviakna Saviakna 23/04/2016
  5. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 23/04/2016
  6. a k nema 24/04/2016
    • Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 25/04/2016

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