” कश्मीर हमारा है ”

कश्मीर हमारा है
“कश्मीर हमारा हैं”
जन-जन से पूछो तुम कश्मीर हमारा है ,
हर घर- घर से पूछो तुम कश्मीर हमारा है ,
मौला के मह्जिदों से पूछो तुम कश्मीर हमारा है ,
माँ गंगा की घाटों से पूछो तुम कश्मीर हमारा है ,
वतन पे शहीद जवानों से पूछो तुम कश्मीर हमारा है ,
जन-जन से पूछो तुम कश्मीर हमारा है !

उल्फ़त में फसे लोगो ने अहसास विपरीत फ़रमाया है ,
देश के गद्दारों से निजी संबंध बनाया है ,
लोकतंत्र के नाम पे ये देश में षड्यंत्र रचाता है ,
भूल जाता है अपने अम्मा को ,
गीत वतन विपरीत गाता है ,
जन-जन से पूछो तुम कश्मीर हमारा है ,
हर घर-घर से पूछो तुम कश्मीर हमारा है !

संवैधानिक तत्वों को कम से कम देखो तुम ,
राज्य की राजनितिक व्यवस्था को कम से कम समझो तुम ,
विचार विमर्स कर लिया तुमने इतिहास रचना मुस्किल है ,
अहसास कर लिया तुमने पराचित करना मुस्किल है ,
जन-जन से पूछो तुम कश्मीर हमारा है ,
हर घर-घर से पूछो तुम कश्मीर हमारा है !

लाल चौक पे झंडे गाड़ हम चले आये है ,
आतंकवादियों को चुनौतियों देकर हम चले आये है ,
रक्त बहा है रन भूमि में मिट्टी भी लाली है ,
लाडला है उसके अब करनी हमे लड़ाई है ,
जन-जन से पूछो तुम कश्मीर हमारा है ,
घर-घर से पूछो तुम कश्मीर हमारा है !

लहू-लुहान हो जायें पर सीमा छोड़ नही करेंगे ,
मर जायेंगे पर लौट कर घर नही आयेंगे ,
भारती के रखवाले है शहीद वतन पे हो जायेंगे,
देश के बुनयादी फ़तह पे तिरंगा को लहरायेंगे ,
जन-जन से पूछो तुम कश्मीर हमारा है ,
घर-घर से पूछो तुम कश्मीर हमारा है ! (लेखक: कवी निशांत भारद्वाज राजपूत)

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