“ नफ़रत भी सफल बना सकती हैं “

तेरी नफ़रत ने हमे वो बनाया की ,
जब हम गलियों से निकलते ,
तो लोग पूछ ही लेते ,
वो शख्स कौन है !

मुझे लगता था की ,
जीना मुस्किल था यहाँ ,
पर तेरी याद हमेशा सताती थी ,
अंतर-आत्मा से नई उमीदें बहार आती थी !

मै टूट कर बिख़र गया था ,
पागलों के तरह भटक गया था ,
अकेला-पन का अहसास था ,
कुछ करने का जूनून सवार था !

सुबह के साथ अहसास नया होता था ,
शाम ढलने पे जज्बात नया होता था ,
मिलने-जुलने की आदत तो थी नही ,
पर घुल-मिल जाने का अहसास नया होता था !

मै भूला भी नही पाया तुम्हे ,
कई कोशिशों के बाद भी ,
मै तुम्हे पा भी नही पाया ,
कई कोशिशों के बाद भी !

तब भी लोग मुझे आशिक कहते है ,
प्यार के तरीकों को हमसे सिखा करते है ,
क्या समझाऊ उनकों जो मै खुद नही समझ पाया ,
प्रेमी होकर प्रेम नही कर पाया !

लेखक : कवी निशांत भरद्वाज राजपूत
संकाय : राजनीतिकशास्त्र एवं अन्तराष्ट्रीय अध्ययन
(पांडिचेरी विश्वविद्यालय)
MOB: 7598121941

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