कन्या भ्रूण हत्या

कन्या भ्रूण हत्या जो इस तरह बढ़ती रही
सोचिये क्या देश का भविष्य हो जाएगा |
सतयुग में पांडवो ने ब्याहा था एक द्रोपदी को,
कलयुग में द्रोपदी पांडवो को ब्याहेगी||

दूज और राखी के त्यौहार अर्थ खो देंगे,
किसकी डोली को भाई कन्धा लगाएगा |
लड़के और लड़की का अनुपात अगर बिगड़ा तो,
प्रकृति और समाज का ढांचा हिल जाएगा ||

नारी के वजूद को काम आंकने वाले
नर का दिमाग भी ठिकाने लग जाएगा |
गर्भवान होने से, प्रसव की पीड़ा तक,
हाल क्या होता है पता चल जाएगा ||

जाग जा तू अब भी नर, खुमारी से जाग जा,
वर्ना अपनी करनी पे आप हे पछताएगा |
देवी न समझ सके, नारी को इंसान समझ,
पापों का बोझ कुछ हल्का हो जाएगा ||

नारी एक जिस्म नहीं, नारी एक माँ भी है,
दूध का तू उसके कैसे क़र्ज़ चुकाएगा |
बहिन भी है बेटी भी, सखी भी, और पत्नी भी,
हर रूप में उसके, तू प्यार बहुत पाएगा ||

रोक दे, तू रोक दे भ्रूण हत्या तू अब भी रोक दे,
वर्ना अपनी करनी पे आप हे पछताएगा |
तेरा भी तो स्वार्थ छुपा है ,
वर्ना तू खुद ही इतिहास बन जाएगा,
वर्ना तेरा खुद का वजूद मिट जाएगा ||

3 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 23/04/2016
  2. C.M. Sharma babucm 23/04/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 23/04/2016

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