कैसा हैं यह कलयुग

१.कैसा हैं यह कलयुग
कैसी इसकी माया
जहा अपनों नैं अपनों को
अपना शिकार बनाया
कैसा हैं यह कलयुग
२. इस कलयुग नै ऐसा कहर मचाया
माँ बाप भाई बहन बेटा बहु
सबको अपनी ऊँगली पर नचाया
किसी को किसी का होने न दिया
अपनों को पराया बना दिया
परायो को अपना बना दिया
कैसा है यह कलयुग
३. इस कलयुग मैं मतलब की सब दुनिया
मतलब को अपना बना दिया
अपनों को पराया बना दिया
पैसो की माया नै अपना जलवा दिखा
ऐ कलयुग तुने सबको रुला दिया
गेरो को अपनों सें जायदा बड़ा बना दिया
ऐसा है यह कलयुग ऐसी इसकी माया
४.ऊँच नीच जात पात का भेद
ऐसा फलां दिया
इंसान को इंसान का दुश्मन बना दिया
ऐसा हैं यह कलयुग
५. कलयुग नै ऐसा कहर मचाया
हसतो को रुला दिया
रोते को इंतकाम याद दिला दिया
इंसान को इंसान का खुनी बना दिया
बच्चो को माँ बाप का मुजरिम बना दिया
ऐसा है यह कलयुग
ऐसी इसकी माया
by नेहा खोसला

5 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 23/04/2016
    • neha khosla 24/04/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 23/04/2016
    • neha khosla 24/04/2016
  3. neha khosla 24/04/2016

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