ग़ज़ल- जान पाएगा तो कह देगा कहानी की वजह -शकुंतला तरार

ग़ज़ल—

जान जाएगा तो कह देगा कहानी की वजह

मेरे दिल पर तेरे ज़ख्मों की निशानी की वजह ||
मिलते हैं छुप-छुप के आशिक प्यार की आगोश में

सुरमई सँझा की ढलती दरमियानी  की वजह ||
छल कपट मकरो-रिया चारों तरफ है तो क्या

तुम चलो जैसे हो नदिया की रवानी की वजह ||
क्यूँ भटकता फिरे वह व्योम में पंछी बनकर

धन है जीवन का मिला तत्वज्ञानी की वजह ||
देश सेवा से बड़ी सेवा नहीं है कोई भी

वो हिमालय बन गया है निगहबानी की वजह ||
चैन से हम सो रहे सरहद पे मुस्तैदी बढ़ी

है नमन ऐ वीरों तुम हो ज़िंदगानी की वजह ||

शकुंतला तरार-रायपुर (छत्तीसगढ़)

3 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 22/04/2016
  2. C.M. Sharma babucm 23/04/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/04/2016

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