ग़ज़ल -दर्द को तुम धता बता देना -शकुंतला तरार

दर्द को तुम धता बता देना

बंदगी हो तो सर झुका देना ||

देख उपवन में खिलती कलियाँ

मुझको धीरे से तुम सदा देना||

ज़िंदगी किसलिए उदास है तू

गीत ग़ज़लों से हौसला देना ||

चुटकुले सुनके सिर पड़े धुनना

ऐसे कवियों का सिर घुटा देना ||

थके हारे पथिक नहीं छाया

अपने पत्तों को लहलहा देना ||

है मुहब्बत में पहली शर्त यही

मन की कटुता को तुम मिटा देना ||

नित तमाशा दिखा रही पीड़ा

लक्ष्य के पाँव तुम बढ़ा देना ||

हम समझते रहे क़यामत को

“इतना चुपके से रास्ता देना” ||

शकुंतला तरार -रायपुर (छत्तीसगढ़)

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  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/04/2016

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