दीवानों का कारवां ,रचना -डॉ उमेश चमोला

रुकेगा नहीं यह दीवानों का कारवां,
जमीन चाहे उठ पड़े,
झुके चाहे आसमां.

हम सदा चलेंगे,
चलते रहेंगे,
राष्ट्र प्रेम के प्रसून,
दिल में खिलेंगे,
रखेंगे वहीं कदम,
पूर्वजों के जो निशां.

हम कदम से कदम
मिलाकर चलेंगे,
एक का बोझ जो
उसे सब सहेंगे,
रोक सकता नहीं
हमें कोई तूफा.

अलग रूप रंग है,
मगर एक राह है,
राष्ट्र आगे बढे,
सबकी एक चाह है ,
एक थे ,एक हैं
एकता पर है गुमा.

राह से जो गिरा,
उसे उठाएंगे,
मिटाने को हमे चला
उसे मिटायेंगे,
हस्ती हमारी
निहारेगा आसमा
——-डॉ उमेश चमोला

2 Comments

  1. babucm babucm 25/04/2016
    • Umesh Chamola 25/04/2016

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