बेटी का सन्सार

बेटी का संसार
क्यों नहीं मिलता बेटी को दिलों में स्थान
क्यों नहीं दुनियां लेती बेटी को भी अपना मान
क्यों नहीं मिलता बेटी को सम्मान
क्यों नहीं बचा पाती बेटी अपना स्वाभिमान
क्यों नहीं मिलता बेटी को बेटे के समान हक़
क्यों नहीं मिलते बेटी को अधिकार
क्यों बेटी के जीवन को दिया जाता है ढक
क्यों नहीं सुनी जाती उस मासूम की पुकार
क्यों उनको जन्म से पहले मिलती है मौत
क्यों इतनी बुरी है बेटी के प्रति सोच
क्यों बेटी को नहीं मिलते अपने
क्यों अधूरे रह जाते है उसके सपने
क्यों उस मासूम को कर दिया जाता है इतना दूर
क्या है उस बेचारी का कसूर
क्या है वो कातिल
उसने किसी को मारा है
अरे ओ बेदर्द इंसान
उस मासूम ने तेरा क्या बिगाड़ा है
तेरा क्या उजाड़ा है
विक्रम वर्मा

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 21/04/2016
  2. Sanyam mehta 28/04/2017

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