क्या -२ राज बताते लोग

धूप से छाँव चुराते लोग,
हसते और हसाते लोग|

भाई से कभी मिला नही,
दुश्मन से मिलवाते लोग|

भक्त बैठकर सिंघासन पर,
ईश्वर को नचावाते लोग|

नेता का सिर झुका हुआ,
क्या-२ काम करते लोग|

घूँघट से शायद देख रही,
खुद से ही शरमाते लोग|

मैने चलना छोड़ दिया है,
फिर भी आते-जाते लोग|

“शिव” की खामोशी चीख रही,
क्या -२ राज बताते लोग||

7 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 20/04/2016
    • shivdutt 20/04/2016
  2. अरुण अग्रवाल अरुण अग्रवाल 20/04/2016
    • shivdutt 20/04/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 20/04/2016
  4. shivdutt 20/04/2016
  5. C.M. Sharma babucm 21/04/2016

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