सच मेरा ख्वाब हो जाये (ग़ज़ल)

खुदा कसम अगर वो बेनकाब हो जाये
बरसो पुराना सच मेरा ख्वाब हो जाये

एक बार जो छू ले वो बहते दरिया का पानी
तो सारे के सारे समंदर भी शराब हो जाये

इनायत उनकी निगाहों की जो हो मुझ पर
मेरे सारे सवाल खुद ही जबाब हो जाये

वो ठंडी आह ही भरें जो किसी की खातिर
तो दिलजला आफताब भी महताब हो जाये

मेरी दीवानगी की हद्द बस तेरी झलक तक है
पर वो झलक एक बार लाजबाब हो जाये

नहीं तुझे हासिल करना है हितेश का मक़सद
तेरी यादें ही मेरी जिंदगी की किताब हो जाये

हितेश कुमार शर्मा

3 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 20/04/2016
  2. C.M. Sharma babucm 21/04/2016
  3. Hitesh Kumar Sharma Hitesh Kumar Sharma 21/04/2016

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