९. कहती हूँ मैं………………………… | प्रेम गीत |– “मनोज कुमार”

कहती हूँ मैं कसम से कसम से
मुझे है प्यार बस सिर्फ तुम से
दूँगी साजन में रंग प्रेम रंग से
मुझे है प्यार है प्यार तुम से

कहती हूँ मैं, कसम से कसम से…………………………………

अच्छा लगता है मिलकर के तुमसे
रहे तू रूबरू हर समय मेरे दिल के
बाँहों में भर लो मीत सजन के
करना रिप्लेस ना तुम अपन से

कहती हूँ मैं, कसम से कसम से…………………………………

मैंने महेंदी रचाई तेरे नाम की
मेरे झुमके भी गाते तेरी रागनी
मैंने मुँदरी में रखली है तस्वीर भी
मेरी है जिन्दगी में तू ही बस तू ही

कहती हूँ मैं, कसम से कसम से…………………………………

गर उपवन है तू उसकी शोभा मैं हूँ
तेरी साँसों में बसती मैं धड़कन मैं हूँ
मैं तो सजती सवंरती हूँ तेरे लिये
करती हूँ इन्तजार बस तेरे लिये

कहती हूँ मैं, कसम से कसम से…………………………………

“मनोज कुमार”

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 20/04/2016
  2. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 21/04/2016

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