कौन देखने वाला है

# कौन देखने वाला है #
फसाँ भँवर में देश हमारा, चारो ओर घोटाला है।
लुटने वाला लुटे मिलकर, कौन देखने वाला है।।
कानून का रक्षक खुद, चन्द पैसों में बिकता है।
वहशीपन का नंगा नाच, खाकी वर्दी में दिखता हैं।।
भ्रष्टाचार में निकल रहा, कर्तव्य का दिवाला है।
लुटने वाला लुटे मिलकर, कौन देखने वाला है।।
मोबाईल और टेबलेट, युवाँ का पहला निशाना है।
पीता जहर जवानी में, नशे का हुआ दीवाना है।।
दही छांछ कल की बातें, कोका बना निवाला है।
लुटने वाला लुटे मिलकर, कौन देखने वाला है।।
जाति धर्म में विभाजित, हम सबका वोट है।
जिसको हमने चुनकर भेज, देता भारी चोट है।।
नोट लेकर प्रश्न पूछता, करता धंधा काला है।
लुटने वाला लुटे मिलकर, कौन देखने वाला है।।
राजनीति गिरवी हो गई, घोड़ों के व्यापारी की।
नोटों से सरकारें बदलें, माया सब लाचारी की।।
ठगों के आगे जनता करती, ठन ठन गोपाला है।
लुटने वाला लुटे मिलकर, कौन देखने वाला है।।
समाजवाद का अर्थ एक परिवार की जागीर है।
जयप्रकाश, लोहिया की बस लटकती तस्वीर हैं।।
कामरेड भी आज जपता, पूजीवाद की माला है।
लुटने वाला लुटे मिलकर, कौन देखने वाला है।।
कल तक था जो भिखमंगा, आज मालदार है।
मिला न मौका चोरी का, बस वही इमानदार है।।
मेरी भड़ास तो कविता में ही निकलने वाला है।
लुटने वाला लुटे मिलकर, कौन देखने वाला है।

सुरेन्द्र नाथ सिंह “कुशक्षत्रप”

8 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 19/04/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 19/04/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 19/04/2016
  3. C.M. Sharma babucm 19/04/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 19/04/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 19/04/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 19/04/2016
  5. Hemchandra 20/04/2016

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