कुछ नया करते है

कुछ नया करते हैं,
मिल ही जाएंगी राहें,
क्यों यूँ ही बेवजह डरते हैं,
एक कदम ही सही,
कुछ तो आगे बढते हैं,
चलो कुछ नया करते हैं,
कुछ कदम लड़खड़ा गए तो क्या हुआ,
छोटी ही सही एक नइ उड़ान भरते हैं,
किनारे गर छूट गए तो क्या हुआ,
लहरों पर ही आशियाना करते हैं,
रह गए राहों में पन्ने जो,
उन्हें इक बार फिर से लिखते हैं,
चलो कुछ नया करते हैं।

3 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 19/04/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 19/04/2016
  3. Saviakna Saviakna 19/04/2016

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