कैसी ये रात

जाने कैसी ये रात आई है,
जैसे सदियों बिछड़ने के बाद,
कोइ प्यारी मुलाकात आई है,
कुछ ख्वाब लाई है,
कुछ अश्क लाई है,
लगता है तारों कि शक्ल में,
कोई बिखरी सौगात लाई है,
यूँ तो है खामोश सी,
पर शायद हवाओं में छिपा,
कोई अधूरी बात लाई है,
दूर तलक बस सन्नाटों का शोर है,
और इन में डूब जाने को,
ये मुकम्मल हालात लाई है,
यूँ तो लगती अकेली सी,
पर अँधेरों को साथ लाई है,
खुद में ही गुम-सुम सी,
जाने कैसी ये रात आई है।

5 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 17/04/2016
    • Rituraj191 Rituraj191 17/04/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 18/04/2016
    • Rituraj191 Rituraj191 19/04/2016
  3. C.M. Sharma babucm 19/04/2016

Leave a Reply