एक झलक

माथे पर स्वाभिमान का दर्पण
चाल मे शोभा, शब्दों मे संगीत
स्वर्ग लोक की अनुभूति होगी
जिसके हो तुम मीत

शारीरिक हाव – भाव है रहस्य भरे
दृटि मे बिजली की चमक
जब वो आये समीप तुम्हारे
गुलाब की घाटी सी महक

बालों मे काले कजरारे बादल
नयनो मे समूची धरनी का जल
उससे तर्क करने को देती
सुहावना एक मौका समतल

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