नकाब की तरह…….. (ग़ज़ल )

ऐसे ही आ जाया करो तुम, मेरे पहलू में शाम बनकर !
समेट कर रख लिया करू, रोज़ अँधेरी रात की तरह !!

नजरो को गवारा नहीं मिलना, गुफ्तगू भी जरुरी है !
कानो में घुल जाया करो, किसी रसीली बात की तरह !!

कभी तो भरोसा जताया करो, हमे अपना समझकर
यूँ अच्छा नहीं छुड़ाना, हाथ गैर के हाथ की तरह !!

दिल जो चाहता है वो कब मिल पाता है किसी को !
तुम बरस जाया करो बे मौसम बरसात की तरह !!

अब तो चेहरे पे शिकन तमाम नजर आते “धर्म” के !
इनको छिपा दो अपनी मुस्कान से, नकाब की तरह !!

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डी. के . निवातियाँ ___@

16 Comments

  1. babucm babucm 19/04/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 19/04/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 19/04/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 20/04/2016
  3. sarvajit singh sarvajit singh 19/04/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 20/04/2016
  4. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 20/04/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 20/04/2016
  5. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 20/04/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 20/04/2016
  6. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 20/04/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 20/04/2016
  7. योगेश कुमार'पवित्रम' 20/04/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 20/04/2016
  8. अरुण अग्रवाल अरुण जी अग्रवाल 21/04/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 21/04/2016

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