गुमनाम

मोहब्बत का दस्तूर निभाना होगा….
जलते हुए शोलों को भी सहलाना होगा…

रूठी रहोगी तो…रुस्वा होगी मोहब्बत…
अपने आप को खुद ही…मनाना होगा…

यह बाजी तो एकतरफा ही…रही है हरदम….
जीत तेरी होगी नहीं…हार के ही जाना होगा….

इतना भी तग़ाफ़ुल(देर) मत करना तू ए मेरे दोस्त….
जशने हार भी मुझे…तुझ बिन न मनाना होगा….

मिलन का योग ही नहीं…तेरे नसीब में’बब्बू’,
हर दिल में हो फिर भी….गुमनाम सा जाना होगा…

-oOo-
/सी. एम. शर्मा (बब्बू)

2 Comments

  1. mani mani 15/07/2016
  2. C.M. Sharma babucm 15/07/2016

Leave a Reply