अधूरे इश्क का फसाना

अधूरे इश्क का फसाना है,
मुश्किल सा लगता है जिसको,
चंद लफ्जों में बयाँ कर पाना है,
कुछ यादें नई पुरानी है,
जो अब तक याद जुबानी है,
प्यार वहीं उम्मीद वहीं,
बस सदियाँ कुछ पुरानी है,
हाथों से वो हाथ छुड़ाना,
आँखों से वो बात चुराना,
भुल कर भी ना भूलें हम,
कैसी ये प्रेम-कहानी है,
ढूँढते अब भी यादों की गलियों में,
हम बाहों के वहीं सहारे है,
कि शायद कहीं किसी मोड़ पर,
मिल जाए जो बिछड़े किनारे है,
कितने अौर क्यों बताए तुम्हें अब,
कैसे ये दर्द हमारे हमारे है,
लगता अब बेमानी सा हम को,
तुमको ये सब सब समझाना है,
बस इतना सा अब कहना है,
जिसे कभी तुम छोड़ गई थी,
ये उसी अधूरे इश्क़ का फसाना है।

3 Comments

  1. योगेश कुमार 'पवित्रम' योगेश कुमार 'पवित्रम' 15/04/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/04/2016
  3. babucm babucm 16/04/2016

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