शक्की पत्नी और लाचार पति

एक शक्की पत्नी का पति
जब भी कहीं से घर आता।
पत्नी उसकी जाँच पड़ताल करती
लाचार पति बेबस घबराता।।
अगर पति के कपड़ों पर कोई
बाल भी दिखाई दे जाता।।
तो तांडव मचाती और
उठा लेती थी सिर पर आसमान।
एक बार पति के कपड़ों पर
नहीं मिला बाल का, नामोनिशान।।
न जाने क्या सुझा उसको
लगी फूट-फूटकर रोने
बोली- तो अब गंजी औरतें भी
नहीं छोड़ी तुने।।
लाचार पति ने कहा
हे हृदेश्वरी, प्राणेश्वरी, प्राणप्रिये,
सहा भार्या, दारा,
सहधर्मिणी, गृहस्वामिनी
प्राणवल्लभे, नयनतारा।।
वामांगीत्रिया, अर्द्धांगिनी,
गृहिणी, कलत्र, कान्ता,
इन सबसे बढ़ कर मेरे
2 बच्चो की माता ।।
तेरे चरणों का दास,
तुमको कैसे समझाता।।
पहले जो तुम बाल
मेरे कपड़ो पर पाती थी।।
वजह तुम dove का शम्पू
नहीं आजमाती थी।।
नुरा कुश्ती के क्षण
जो तेरी निशानी रह जाती थी।।
मेरे जैसे संत और पत्नी प्रिय
को, व्यभाचारी ठहराती थी ।
आज कल तुम dove शम्पू
जो तुम करती हो।।
निचे से ऊपर के बालो को
बड़े प्यार से धोती हो।।
नुरा कुश्ती करके भी
तेरा बाल बाका नहीं हो पाता है।।
हक़ तुझे बेशक है, शक से देख,
पर यारी भी देख ।।
ऐब हम में देख पर प्राणप्रिये!
वफ़ादारी भी देख ।।

सुरेन्द्र नाथ सिंह “कुशक्षत्रप”

8 Comments

  1. योगेश कुमार 'पवित्रम' योगेश कुमार 'पवित्रम' 15/04/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप Surendra Nath Singh 18/04/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/04/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप Surendra Nath Singh 18/04/2016
    • Ahsaan Quareshi 19/04/2016
      • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 19/04/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 16/04/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप Surendra Nath Singh 18/04/2016

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