८. दिल दिल्ली वाली ले गयी………. |प्रेम गीत|– “मनोज कुमार”

लाल चूनर वाली ले गयी
दिल लूट के मेरा ले गयी
मृग नैन नशीली ले गयी
दिल दिल की रानी ले गयी
ले गयी ले गयी ले गयी
दिल दिल्ली वाली ले गयी

सिवा उसके नही कुछ भी भाता
बिना उसके रहा अब ना जाता
बुरा हाल हुआ तब से मेरा
जबसे दिल ही नही पास मेरा
सितम हमपे सनम कर गयी
दिल दिल्ली वाली ले गयी

लाल चूनर वाली ले गयी……………………

थी नदिया की धारा सी चाल उसकी
नैना जिसकी बड़ी गहरी पाताल सी
जुल्फ़ उसकी घनेरी थी काली बड़ी
कातिल मुस्कान थी सोख आहें भरी
जादू कर पल में जालिम गयी
दिल दिल्ली वाली ले गयी

लाल चूनर वाली ले गयी……………………

अब जगाने लगी है जो खवाबों में रोज़
खुद तो सोती नही सोने देती ना रोज़
करके कोई बहाना तोड़ जाती है कोल
वो सताती है मुझको रुलाती भी रोज़
दिल ज़ख्मी सनम कर गयी
दिल दिल्ली वाली ले गयी

लाल चूनर वाली ले गयी……………………

“मनोज कुमार”

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