सुरज बनु

सिमटी हुँ मैं खुद में
जग से खुद को छिपाये
उर में इच्छा है प्रबल
दैदीप्त सुरज बनु।।

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 13/04/2016
    • Saviakna Saviakna 13/04/2016

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