तू साथ है तो ||ग़ज़ल||

तू साथ है तो ज़िंदगी मधुमास है |
तुझे पाना ही ज़िंदगी की ख्वाहिश है |

खुदनुमा न कर सनम दिल जलता है ,
इस पागल आशिक का तू ताश है |

खुदाई भूल बैठा हूँ तेरी चाहत में ,
इस बात की क्या तुम्हें एहसास है |

खुमार चाहत का दिल से उतरता नहीं ,
जाने क्या जादू सनम तेरे पास हैं |

चल रही है पुरवा खुशनुमा शाम है ,
ऐसा लगा उनकी आने की आश है |

“चित्रांश” तुझी से है ज़िंदा यहाँ पर ,
तू ही मेरे ज़िंदगी की तासीस है |

ताश – साथी
खुद्नुमा – अपने सौंदर्य को प्रदर्शन करने वाली
खुदाई – संसार
तासीस – आधार , बुनियाद

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