==* समझौता *==

हक नही मुस्कुराने का
मगर मुस्कुरा लेता है
अपने ही सपनो को वो
ऊजाड़ कर जी लेता है

न कर यकीं इस चेहरे पर
ये चेहरा तो दगा देता है
दिख रहा जो सच नही
सच भी बेवफा होता है

समझ न पाया खुदको
हकीकत या तमाशा है
अब तो दिल भी हार चूका
हकीकत को अपनाना है

शशि का क्या है यारो
जो है बस वही जी रहा है
क्या शिकायत जिंदगी से
समझौता कर लिया है
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✍शशिकांत शांडिले, नागपूर
भ्र. ९९७५९९५४५०
Samjhauta

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