शाम की शीतल हवा………गजल-4

शाम की शीतल हवा मन को मेरे भाती तो है ।
कोयल कू – कू ही करे कहने को वो गाती तो है ।।
मोह माया के भंवर से खुद को बचा लो दोस्तों ।
यह शांत मन मे वेदना के बीज बो जाती तो है ।।
उसकी मृदुल वाणी सुनकर धूप शीतल हो गयी ।
पास मेरे प्यार की अनमोल यह थाती तो है ।।
मन मेरा है बावरा बेचैन उसको ढूँढता ।
सहज मनमोहक छवि उसकी मुझे भाती तो है ।।
मै उसके एक इशारे पर ही अपनी जान दे दूँगा ।
वो खुले दिल से राज अपने मुझको बतलाती तो है ।।
गर जीते जी उसने वफा नहीं किया तो क्या हुआ ।
अब मेरे मजार पर हर रोज वो आती तो है ।।
मुझसे उसे भी इश्क था अब ये नुमाया हो गया ।
अब सच्चे मन से प्रेयसी का फर्ज निभाती तो है ।।

राज कुमार गुप्ता – “राज“

6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 10/04/2016
    • RAJ KUMAR GUPTA Raj Kumar Gupta 11/04/2016
  2. Vimal Kumar Shukla Vimal Kumar Shukla 10/04/2016
    • RAJ KUMAR GUPTA Raj Kumar Gupta 11/04/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 11/04/2016
    • RAJ KUMAR GUPTA Raj Kumar Gupta 11/04/2016

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