ऐसा नया साल हो

——-ऐसा नया साल हो ——-

घर घर हो उल्लास खुशियों का रहे वास
और उपवास से शुरू ये नया साल हो
पश्चिम के अन्ध में भटकते धर्माँधो को
मंजिल दिखाता इक राह नया साल हो
कुर्बानिया ना कोख में ही कन्याओं की हो
और धेनु रक्षा का ये प्रण नया साल हो
हो पाखण्ड बंद सनातन हो बुलंद
हर इक साल से ये बेमिसाल नया साल हो

नव वर्ष की शुभकामनाएँ

कवि देवेन्द्र प्रताप सिंह “आग”
9675426080

One Response

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 08/04/2016

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