गज़ल —-चलो इन्सान बन जायें !

ग़ज़ल –!! चलो इंसान बन जायें !!

आज हम साथ मिलकर के एक पहचान बन जायें !
न तो हिंदू ,न ही मुस्लिम ,चलो इन्सान बन जायें !!

नफरत की गलियों में ना जज्बात घायल हों !
चलो इक दूसरे की हम यहाँ मुस्कान बन जायें !!

ना चाहिये बाबरी मस्जिद ना तो मंदिर अयोध्या का !
जहाँ अरमान पूरे हों वो हिंदुस्तान बन जायें !!

इसे गजनी नें भी लूटा यहाँ जयचंद कायर था !
लगा दें जान की बाजी चलो चौहान बन जायें!!

लाल के कैद के बदले जिसने मुल्कियत माँगी !
नमन कर हम उसे टीपू सुल्तान बन जायें !!

जिहादी जंग के ऊपर चलो मिलकर लड़ेंगे हम !
मिटेगा भय का हर साया चलो तूफान बन जायें !!

अनुज “इंदवार “

3 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 07/04/2016
  2. Rachana sharma Rachana sharma 25/04/2016
  3. Rachana sharma Rachana sharma 25/04/2016

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