मेरी आवाज़

तू रुक जाएगी,तो भी चलेगा!
तू थम जाएगी,तो भी चलेगा!
पर तेरा यू खामोश होना ‘ए जिन्दगी’

मुझे बर्दाश्त नहीं!!

नहीं मन्जुर मुझे तेरा यू अक्सर मुझसे रुठ जाना,
यू अक्सर ‘जशन-ए-जिन्दगी’मे,मुझे तन्हा छोड जाना,
तू गर दे न सकी खुशी,तो भी चलेगा•••
पर मेरी मुस्कुराहटों ने तेरी बेरुखी,

मुझे बर्दाश्त नहीं!!

ठोकर चाहे तो कितनी भी मार ले,
जा तैयार कर ले अन्गारे तू हजार,
पर तेरा यू,यू पल-पल मुझे कमजोर बनाना,

मुझे बर्दाश्त नहीं!!
मुझे बर्दाश्त नहीं!!

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