चलो आज कुछ तूफानी करते है …..!!

चलो आज कुछ तूफानी करते है …..!!

सूरज को कैद कर मुट्ठी में
धुंधले नजारों की सैर करते है
चाँद को छुपाकर दामन में
स्याह रात का दीदार करते है

चलो आज कुछ तूफानी करते है …..!!

सागर को लेकर अंजलि में
लहरों से बाते दो चार करते है
पर्वत को झूला कनिष्का पर
गहरी खाइयो को अब भरते है

चलो आज कुछ तूफानी करते है …..!!

नेताओ को देकर देश से आजादी
फ़कीर और बाबाओ को सूत्रधार करते है
स्कूल कालेजों को दे संसद का दर्जा
पुलिस प्रशाशन को जनता का हक प्रदान करते है !!

चलो आज कुछ तूफानी करते है …..!!

गृह क्लेश से मिले सबको मुक्ति,
इसका अब कुछ इस तरह से हम निदान करते है
बिल्ली को बैठाकर दूध की रखवाली
सास बहु को एक दूजे का सरकार नियुक्त करते है !

चलो आज कुछ तूफानी करते है …..!!

बीबियो को दिखाकर उनकी तरह आँखे
घर का सारा कारोबार अपने हाथ से करते है
कह दो उनसे आज जी भर आराम करे
एक दिन का उनको भी अवकाश प्रदान करते है !

चलो आज कुछ तूफानी करते है …..!!

संकट के बादलों को छुपाकर नयनो में
गम के मारो पर खुशियो की बरसात करते है
झुकाकर कदमो में इस खुदगर्ज जमाने को
जग पालक परमात्मा के चरणों में स्वय को अर्पण करते है !!

चलो आज कुछ तूफानी करते है …..!!

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डी. के. निवातियाँ _______@

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/04/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 06/04/2016
  2. Mohit rajpal Mohit rajpal 07/04/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 07/04/2016

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