दर्द

मैं सरिता कल कल करती…मेरी पीड न जाने कोई…
जो भी आता मैल ही धोता…बिन पूछे मुझे हर कोई !

समय के साथ बहती मैं हर पल….जाने है हर कोई….
फिर भी अपने मतलब को मुझे बींध रहा हर कोई !

क्या रंग है मेरा अपना….रंग अपना भर जाता हर कोई…..
दर्द अपना मैं किस से कहूँ…..बेदर्द है हर कोई !

काश फिर से आये भागीरथ….फिर आये शिव कोई…..
मुझको अपने संग में ले ले….पीड रहे न कोई !
!
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सी. एम. शर्मा (बब्बू)

4 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 06/04/2016
    • C.M. Sharma babucm 06/04/2016
  2. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 31/05/2016
    • C.M. Sharma babucm 08/06/2016

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