हर बात तुम्हारी अच्छी है

मैं तुम से बेहतर लिखता हूँ..
पर भाव तुम्हारे अच्छे हैं

मैं तुमसे बेहतर दिखता हूँ
पर अदा तुम्हारी अच्छी है

मैं तुमसे बेहतर गाता हूँ
पर धुन तुम्हारी अच्छी है

मैं रहता खुश हरदम हूँ
पर मुस्कान तुम्हारी अच्छी है

मैं ग़ज़ल खूब कहता हूँ
पर तक़रीर तुम्हारी अच्छी है

मैं कितना भी कुछ कहता रहूँ
पर हर बात तुम्हारी अच्छी है
(this mine poem was published in dainik bhaskar Madhurima on 04.11.2015 under Heading Tumhari Baat)

2 Comments

  1. Safaq Jamal 05/04/2016
  2. C.M. Sharma babucm 06/04/2016

Leave a Reply