नाकाम-ए-इश्क़

इतना मुश्किल भी नहीं “इंदर”
अल्फाज़ों को अक्स देना
उल्फ़त-ए-मंज़िल के किनारों तक
गर इश्क़ न पहुँचा हो…

…इंदर भोले नाथ…
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  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/04/2016

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