* प्रकृति *

प्रकृति ने ब्रह्माण्ड बनाया ,
सूर्य बनाया चाँद बनाया
समुन्द्र और धरातल बनाया
वन उपवन नदी झड़ना से इसे सजाया ,
अनिको जीव-जंतु यहाँ बसाया ,
हर प्राणी का उसे रहा ख्याल ,
मानव का उसने किया निर्माण
इसे सर्वश्रेष्ठ मस्तिक और ज्ञान दिया
जिज्ञासा को इसके अंदर उतार दिया
प्रकृति ने सभी को सब कुछ प्रदान किया
नियम कानून और कर्म से
सभी को बंधन में बांध दिया ,
जो भी इसे तोड़ेगा नजर अंदाज करेगा
उसका हर्जाना भरेगा ,
मानव तुम हो होशियार
नरेन्द्र का है यह पुकार
प्रकृति के नियम से न करो खेलवार
नहीं तो होगा सम्पूर्ण जगत का नाश।

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 04/04/2016
    • नरेन्द्र कुमार नरेन्द्र कुमार 04/04/2016

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