* तुलसी और कबीर *

तुलसीदास ने चौपाई लिखा ,
कबीर ने साखी सुनाई।
जो होगा और हो रहा ,
सच्ची दिया बताई।।

एक सगुनी दूजा निर्गुणी ,
दोनों ही राम को माने।
कर्म पूजा और मानवता को ,
सच्ची भक्ति जाने ।।

एक ने घर-वार छोड़ा ,
श्री राम से नाता जोड़ा।
दूजा गृहस्ती में
सन्यासी जीवन बिताई ।।

एक काल की विवेचना दे ,
दूजा समाज की सूचना दे।
जन जस के तस रहे ,
सुन दोहा साखी चौपाई ।।

जन इनकी जयन्ती मनाए ,
कबीर पंथी कहलाए।
इनके ज्ञान और पंथ को ,
सब ने दिया भुलाई ।।

कहें नरेन्द्र सुनो ज्ञानी ,
न बनो तुम अभिमानी।
कर्म-धर्म से नाता जोड़ो
मानवता को न छोड़ो ।।

अगर आप इन्हें जानते हैं ,
अपना गुरु मानते हैं।
आडम्बर से बाहर निकलो ,
इनको पथ को लो अपनाई ।।

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 04/04/2016
    • नरेन्द्र कुमार नरेन्द्र कुमार 04/04/2016

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