साथ

क्या है साथ?
अम्बर का झुके रहना धरा पर
या बूंदो का भरना सरोवर?
खुशबू का लिपटे रहना सुमन से
या किरनों का सिमटे रहना सूरज से ?
सुहागन की सिंदूरी माँग
या दोस्त पर लुटाना जान?

क्या है साथ?
बुढ़ापे में लाठी का सहारा
या विकट कष्ट में सिर्फ प्रभु का आसरा?
कुएँ का बुझाना प्यास
या पौधों का देना साँस ?
लताओं का लिपटना वृछों से
या काजल का सजना दृगों में?

साथ-
साथ, साथी का सच्चा साथ है,
साथ, झुर्रियों में भी जो थामे वो हाथ है ।
साथ, खुशियों में होठों पर आई मुस्कुराहट है,
साथ, गम में पलकों पर छाई
आँसू की छलछलाहट है ।।
साथ, सपनो का नयनों में बसना है,
साथ, तितलियों का फूलों पर मंडराना है ।
साथ रंग है,
साथ उमंग है,
साथ समुद्र में
लिपटी तरंग है ।।
साथ एक आस है,
साथ एक विश्वास है,
जो दूरी को करता पास है ।

जो साथ निश्छल,
जो साथ सच्चा,
वो साथ निर्मल,
वो साथ पक्का।।

चाहे हो भोर की लाली
या हो घोर अँधयारी,
साथ के हीं एहसास से
दुनिया जीती,
दुनिया हारी।
. अलका

3 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 02/04/2016
    • ALKA प्रियंका 'अलका' 03/04/2016
  2. Swati naithani Swati naithani 05/05/2016

Leave a Reply