ख्वाबों की तरह…

ख्वाबों की तरह रुख्सत सी हुई
“ज़िंदगी” तूँ जब अब्सारों से…
है धुंधला सा हुआ चिराग-ए-दिल
राह-ए-उल्फत के नज़ारों से…

…इंदर भोले नाथ…
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2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 02/04/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 02/04/2016

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