कश्ती – मेरी शायरी……. बस तेरे लिए

कश्ती

ग़म के समन्दर में उम्मीदों की कश्ती
चलाये जा रहे हैं हम ……………
शायद मंज़िल मिल जाए
हमें कुछ दूर ………….. चलने पर

शायर : सर्वजीत सिंह
sarvajitg@gmail.com

4 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 02/04/2016
    • sarvajit singh sarvajit singh 03/04/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 02/04/2016
    • sarvajit singh sarvajit singh 03/04/2016

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