५. लड़को से बढकर है लड़की……………. ||गीत ||– “मनोज कुमार”

लड़को से बढकर है लड़की, हर लड़की गुलशन |
गंगा सी पावन है ये, गंगा सी निर्मल || ……………..

इनसे है संसार हमारा, महके घर आंगन|
इनसे है जीवन हमारा, इनपर ही निर्भर ||
फूलों सी सुन्दर है लड़की,फूलों सी कोमल|
इन्हें बचाओ इन्हें ना मारो, ना करो शोषढ़||

लड़को से बढकर है लड़की, हर लड़की गुलशन |
गंगा सी पावन है ये, गंगा सी निर्मल || …………….

त्याग भावना इनसे सीखो, इनसे जग रोशन |
एक नही दो घरों में इनका, बट जाता जीवन||
प्यार करो लड़को के जितना, ना उनसे कम |
कंधे से कन्धा मिलाकर, युग युग से है संग ||

लड़को से बढकर है लड़की, हर लड़की गुलशन |
गंगा सी पावन है ये, गंगा सी निर्मल || ……………..

कभी थी इंद्रा, कभी कलप्ना,कभी ये मेरीकोम|
कहीं डॉक्टर कहीं वकील , रूप अनेकों कोम ||
पक्षपात बिल्कुल ना करना, ना रखना बंधन |
लड़की धन ऐसा है,जिसको समझाना है कम||

लड़को से बढकर है लड़की, हर लड़की गुलशन |
गंगा सी पावन है ये, गंगा सी निर्मल || ……………..

“मनोज कुमार”

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 02/04/2016
    • MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 03/04/2016

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