गुस्ताखियों से अपनी…

गुस्ताखियों से अपनी सिला पूछ रहा हूँ ।
नादाँ हूँ जो माज़ी का पता पूछ रहा हूँ ।।

वादा-ए-वस्ल करके हरदम वो तोड़ती है ।
है कौन सी ये उसकी अदा पूछ रहा हूँ ।।

वो इस तरह गयी थी मेरी ज़िन्दगी से यारों ।
मुझसे हुई थी क्या अब ख़ता पूछ रहा हूँ ।।

दिल तोड़ के गया है वो कौन से जहां में ।
उसको भला अब क्या दूं सज़ा पूछ रहा हूँ ।।

— अमिताभ आलेख

4 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 31/03/2016
    • आमिताभ 'आलेख' आमिताभ 'आलेख' 31/03/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 31/03/2016
    • आमिताभ 'आलेख' आमिताभ 'आलेख' 31/03/2016

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