३. है चंदा जैसा मुखड़ा…………. ||गीत ||– “मनोज कुमार”

है चंदा जैसा मुखड़ा सनम तेरा सनम तेरा |
है चाँदी जैसा सुन्दर ये तन तेरा तन तेरा ||

करना लगे प्यारा तेरा आलिंगन |
चंचल है अदायें तड़पाता यौवन ||
करता है नशा होले मदिरा जैसा |
खिलता रहे फूलों जैसा मन तेरा ||

है चंदा जैसा मुखड़ा सनम तेरा सनम तेरा |
है चाँदी जैसा सुन्दर ये तन तेरा तन तेरा ||

होठों पे मुस्कान बड़ी प्यारी है |
मनचली शर्मीली जान हमारी है ||
तेरी तिरछी नजर लवलव कहती है |
साजन की तस्वीर दिल में रहती है ||

है चंदा जैसा मुखड़ा सनम तेरा सनम तेरा |
है चाँदी जैसा सुन्दर ये तन तेरा तन तेरा ||

पतली कमर जब बल खाये |
दिल धड़कन बढ़ बढ़ जाये ||
तुमने मुड़कर जब पीछे देखा |
ऐसा लगा चाँद जमीं पे आया ||

“मनोज कुमार”

One Response

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 31/03/2016

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