कंकरों की दुनिया

अटल पर्वतों से इरादे, एक झोके से हिल गए
समंदर के राजा, कंकरो में मिल गए
खुद की हस्ती मिटाकर, बेआस हो चले
टूटकर चट्टान पत्थरों में मिल गए||

इन पथरों में भी कभी, भगवान तराशा जाएगा
खुद को ढूंढ ले, खुदा भी मिल जाएगा
कंकर ही दुनिया हो चाहे,ये ज़िन्दादिली कम ना कर,
तु कंकरों के बीच सीप की मोती नज़र आएगा।।

–वर्षा सक्सेना–

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  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 31/03/2016

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