ये मोहब्बत करने वाले…

ये मोहब्बत करने वाले हमें क्या सिखा गए।
तुमको तो दीवाना हमे शायर बना गए।।

जवान होती बेटियां और बूढ़े होते माँ-बाप।
इंसान के ईमान को कायर बना गए।।

मुफ़लिसी में जो धोता था किसी के झूठे बर्तन।
शहर के हालात उसे पेशेवर बना गए।।

लहू देकर के सींचे थे उसने जो दो बच्चे।
आफ़त-ए-जान उसे घर का सौदागर बना गए।।

उन तमाम हादसों को भी ‘आलेख’ का सलाम।
जो एक कमबख़्त को बड़ा सुख़नवर बना गए।।

— अमिताभ ‘आलेख’

4 Comments

  1. अरुण अग्रवाल अरुण जी अग्रवाल 30/03/2016
    • आमिताभ 'आलेख' आमिताभ 'आलेख' 31/03/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 31/03/2016
    • आमिताभ 'आलेख' आमिताभ 'आलेख' 31/03/2016

Leave a Reply