अब किसी को आना होगा

अब किसी को आना होगा
अब किसी को आना होगा।
भ्रष्टाचार रूपी दानव को
भारत से हटाना होगा।
गांधीजी के सपने को
सच करके दिखलाना होगा
भगत राजगुरु की फाँसी का
कुछ तो फायदा लेना होगा।
अब किसी को आना होगा
अब किसी को आना होगा।

गांधी का सपना था ये
स्वतंत्र भारत पैदा होगा
सुख-दुःख में लोग साथ रहेंगे
कभी किसी का न अहित होगा
भाईचारे से लोग रहेंगे
न कोई साम्प्रदायिक दंगा होगा
ऐसा नाम बनेगा विश्व में
सोने की चिड़िया फिर कहलायेगा
सदभाव व भाईचारे में
जगत में माना जायेगा।

पर मालुम नही था उनको
सब इसके विपरीत होगा
देश का रक्षक नेता ही
एक दिन भक्षक बन जायेगा
भ्रष्टाचार रूपी रावण ही
दिल में उनके विराजमान होगा।
अब किसी को आना होगा
अब किसी को आना होगा।

भ्रष्टाचार दानव भारत को
दीमक की तरह खा जायेगा
इक दिन विश्वगुरु का नाम
मिट्टी में मिल जायेगा
भाईचारे का नाम न होगा
भाई ही भाई को मारेगा
अब किसी को आना होगा
अब किसी को आना होगा।

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